जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरूर करनी चाहिए

*🌻 जो नित्य है वह कारण है और अनित्य है वह कार्य है.. मैं तो नित्य हुँ, शरीर अनित्य है.. इस शरीर के पहले भी मैं था, शरीर के बाद भी मैं रहूँगा.. बचपन में भी मैं था बचपन बदल गया.. जवानी में भी मैं हुँ.. रोग में भी मैं था.. रोग चला गया, मैं तो हुँ.. ऐसे ही मौत आ जाएगी शरीर मर जायेगा, मैं तो रहूँगा ।*

*🌻मन से पार होना हो तो सद्गुरु के आज्ञापालन में, सद्गुरु के अनुसार साधना करने में तत्पर हों ।*

By नमोन्यूजनेशन

देश सेवा हिच ईश्वर सेवा

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