🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक – 26 फरवरी 2022*
⛅ *दिन – शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078*
⛅ *शक संवत -1943*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – वसंत ऋतु*
⛅ *मास – फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार- माघ)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – दशमी सुबह 10:39 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र – मूल सुबह 10:32 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा*
⛅ *योग – सिद्धि रात्रि 08:52 तक तत्पश्चात वयतीपात*
⛅ *राहुकाल – सुबह 09:57 से सुबह 11:24 तक*
⛅ *सूर्योदय – 07:02*
⛅ *सूर्यास्त – 18:40*
⛅ *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – विजया एकादशी, (स्मार्त), स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती (ति. अ.)*
💥 *विशेष -*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
➡ *26 फरवरी 2022 शनिवार को सुबह 10:40 से 27 फरवरी, रविवार को सुबह 08:12 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 27 फरवरी, रविवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
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🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा*
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🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞

🌷 *त्रिस्पृशा का महायोग* 🌷
🙏🏻 *त्रिस्पृशा का महायोग : हजार एकादशियों का फल देनेवाला व्रत*
➡ *27 फरवरी 2022 रविवार को त्रिस्पृशा-विजया एकादशी है ।*
🙏🏻 *एक ‘त्रिस्पृशा एकादशी’ के उपवास से एक हजार एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है । इस एकादशी को रात में जागरण करनेवाला भगवान विष्णु के स्वरूप में लीन हो जाता है ।*
🙏🏻 *‘पद्म पुराण’ में आता है कि देवर्षि नारदजी ने भगवान शिवजी से कहा : ‘‘सर्वेश्वर ! आप त्रिस्पृशा नामक व्रत का वर्णन कीजिये, जिसे सुनकर लोग कर्मबंधन से मुक्त हो जाते हैं ।”*
🙏🏻 *महादेवजी : ‘‘विद्वान् ! देवाधिदेव भगवान ने मोक्षप्राप्ति के लिए इस व्रत की सृष्टि की है, इसीलिए इसे ‘वैष्णवी तिथि कहते हैं । भगवान माधव ने गंगाजी के पापमुक्ति के बारे में पूछने पर बताया था : ‘‘जब एक ही दिन एकादशी, द्वादशी तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में त्रयोदशी भी हो तो उसे ‘त्रिस्पृशा’ समझना चाहिए । यह तिथि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देनेवाली तथा सौ करोड तीर्थों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है । इस दिन भगवान के साथ सदगुरु की पूजा करनी चाहिए ।”*
🙏🏻 *यह व्रत सम्पूर्ण पाप-राशियों का शमन करनेवाला, महान दुःखों का विनाशक और सम्पूर्ण कामनाओं का दाता है । इस त्रिस्पृशा के उपवास से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं । हजार अश्वमेघ और सौ वाजपेय यज्ञों का फल मिलता है । यह व्रत करनेवाला पुरुष पितृ कुल, मातृ कुल तथा पत्नी कुल के सहित विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है । इस दिन द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करना चाहिए । जिसने इसका व्रत कर लिया उसने सम्पूर्ण व्रतों का अनुष्ठान कर लिया ।*
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🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩

By नमोन्यूजनेशन

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