आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 17 अप्रैल 2023*
*⛅दिन – सोमवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2080*
*⛅शक संवत् – 1945*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*⛅मास – वैशाख (गुजरात, महाराष्ट्र में चैत्र)*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – द्वादशी दोपहर 03:46 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद रात्रि 02:28 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद*
*⛅योग – ब्रह्म रात्रि 09:07 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल – सुबह 07:53 से 09:29 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:18*
*⛅सूर्यास्त – 07:01*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:48 से 05:33 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – सोमप्रदोष व्रत*
*⛅विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) एवं त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🔹सोमप्रदोष व्रत – 17 अप्रैल 2023🔹*

*🌹 जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है । प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है । जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं, वह समय शिव पूजा व गुरु पूजा के लिये सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔸गर्मियों में बलप्रद व स्वास्थ्यवर्धक आम🔸*

*🔸पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है । इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं ।*

*🔸आम मीठा, चिकना, शौच साफ़ लानेवाला, तृप्तिदायक, ह्रदय को बलप्रद, वीर्य की शुद्धि तथा वृद्धि करनेवाला है । यह वायु व पित्त नाशक परंतु कफकारक है तथा कांतिवर्धक, रक्त की शुद्धि करनेवाला एवं भूख बढ़ानेवाला है । इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है ।*

*🔸शुक्रप्रमेह आदि विकारों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो, उनके लिए पका आम लाभकारक है । कलमी आम की अपेक्षा देशी आम जल्दी पचनेवाला, त्रिदोषशामक व विशेष गुणयुक्त है । रेशासहित, मीठा, पतली या छोटी गुठलीवाला आम उत्तम माना जाता है । यह आमाशय, यकृत, फेफड़ों के रोग तथा अल्सर, रक्ताल्पता आदि में लाभ पहुँचाता है । इसके सेवन से रक्त,मांस आदि सप्तधातुओं तथा वासा की वृद्धि और हड्डियों का पोषण होता है । यूनानी डॉक्टरों के मतानुसार पका आम आलस्य दूर करता है, मूत्र साफ़ लाता है, क्षयरोग (टी.बी.)मिटाता है तथा गुर्दें व मूत्राशय के लिए शक्तिदायक है ।*

*🔸औषधि-प्रयोग🔸*

*🔸भूखवृद्धि : आम के रस में घी और सौंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होता है । वायु रोग या पाचनतंत्र की दुर्बलता : आम के रस में अदरक मिलाकर लेना हितकारी है ।*

*🔸शहद के साथ पके आम के सेवन से प्लीहा, वायु और कफ के दोष तथा क्षयरोग दूर होता है ।*

*🔸 आम का पना : केरी (कच्चा आम ) को पानी में उबालें अथवा गोबर के कंडे की आग में दबा दें । भुन जाने पर छिलका उतार दें और गूदा मथकर उसमें गुड, जीरा, धनिया, काली मिर्च तथा नमक मिलाकर दोबारा मथें । आवश्यकता अनुसार पानी मिलायें और पियें ।*

*🔸लू लगने पर : उपरोक्त आम का पना एक-एक कप दिन में २ – ३ बार पियें ।*

*🔸भुने हुए कच्चे आम के गूदेको पैरों के तलवों पर लगाने से भी लू से राहत मिलती है ।*

*🔸वजन बढ़ाने के लिए : पके और मीठे आम नियमित रूप से खाने से दुबले – पतले व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है ।*

*🔸दस्त में रक्त आने पर : छाछ में आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है ।*

*🔸पेट के कीड़े : सुबह चौथाई चम्मच आम की गुठलियों का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते है ।*

*🔸प्रदर रोग : आम की गुठली का २ से ३ ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त-प्रदर में लाभ होता है ।*

*🔸दाँतों के रोग : आम के पत्तों को खूब चबा-चबाकर थूकते रहने से कुछ ही दोनों में दाँतों का हिलना और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है । आम की गुठली की गिरी के महीन चूर्ण का मंजन करने से पायरिया ठीक होता है ।*

*🔸घमौरियाँ : आम की गुठली के चूर्ण से स्नान करने से घमौरियाँ दूर होती है ।*

*🔸पुष्ट और सुडौल शरीर : यदि एक वक्त के आहार में सुबह या शाम केवल आम चूसकर जरा-सा अदरक लें तथा डेढ -दो घंटे के बाद दूध पियें तो ४० दिन में शरीर पुष्ट व सुडौल हो जाता । आम और दूध एक साथ खाना आयुर्वेद की दृष्टि से विरुद्ध आहार है । इससे आगे चलकर चमड़ी के रोग होते हैं ।*

*🔸सावधानी : खाने के पहले आम को पानी में रखना चाहिए । इससे उसकी गर्मी निकल जाती है । भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए । अधिक आम खाने से गैस बनती है और पेट के विकार पैदा होते हैं । कच्चा, खट्टा तथा अति पका हुआ आम खाने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है । कच्चे आम के सीधे सेवन से कब्ज व मंदाग्नि हो सकती है ।*

*🔸बाजार में बिकनेवाला डिब्बाबंद आम का रस स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं होता है । लम्बे समय तक रखा हुआ बासी रस वायुकारक, पचने में भारी एवं ह्रदय के लिए अहितकर है ।*

 

*🔹कार्यों में सफलता-प्राप्ति हेतु🔹*

*🔹जो व्यक्ति बार-बार प्रयत्नों के बावजूद सफलता प्राप्त न कर पा रहा हो अथवा सफलता-प्राप्ति के प्रति पूर्णतया निराश हो चुका हो, उसे प्रत्येक सोमवार को पीपल वृक्ष के नीचे सायंकाल के समय एक दीपक जला के उस वृक्ष की ५ परिक्रमा करनी चाहिए । इस प्रयोग को कुछ ही दिनों तक सम्पन्न करनेवाले को उसके कार्यों में धीरे-धीरे सफलता प्राप्त होने लगती है ।*

*🌞🚩🚩 *” ll जय श्री राम ll “* 🚩🚩🌞*

By नमोन्यूजनेशन

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