इमोशंस और केंसर
-केंसर एक जानलेवा रोग हैँ । इसका इलाज बहुत महंगा हैँ ।
-केंसर का मतलब है कोई एक नकारात्मक संकल्प बहुत लम्बे समय तक चलता है तो वह केंसर के रूप में शरीर पर प्रकट हो जाता हैँ ।
-यह ऐसे ही हैँ जैसे हम हथौडे़ से दीवार पर चोट मारते रहें तो पहले हथौडे़ से कुछ नहीं होगा परन्तु जब 1000 बार या इस से ज्यादा बार चोट मारते हैँ तो दीवार उस स्थान से टूट जाती है जहां लगातार चोट मारी है !
-केंसर एक ऐसी ही बीमारी है जो लम्बे समय से चली आ रही नाराजगी को दबाए रखने से पैदा होती है ।
-नाराज हो जाने के बाद हम कई कई दिनो तक आपस में बात नहीं करते ।
-कभी कभी तो ठान लेते हैँ क़ि जिंदगी भर इनसे बात नहीं करेंगे, इसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखेंगे ।
-हम जिंदगी के अति महत्वपूर्ण लोगो से दूर हो जाते हैँ जिनसे हम बहुत प्यार करते थे जो दुख में सदा साथ देते थे ।
-चुटकी में हम उन सभी बातो को भुला देते हैँ ।
-इस वजह हम जिंदगी भर दुखी रहते हैँ और अंदर ही अंदर घुटे रहते हैँ ।
-ऐसी बात न हम किसी को बता सकते हैँ, न ही बताते हैँ और न ही भूल पाते हैँ ।
-जब दूसरा आदमी हमारी उमीद या हमरी नजरो में खरा नहीं उतरता या वैसा नहीं करता जैसा हम चाहते हैँ तो हम उस से नाराज हो जाते हैँ ।
-हम एक बार भी नहीं पूछते क़ि आप ने ऐसा क्यो किया बस जो हमें जंचता है हम एक तरफा उस से नाराज हो जाते हैँ ।
-साथ रहते हुए भी अपनो से दुखी रहते हैँ और उन्ही बातो पर सोचते रहते हैँ और दुश्मनों क़ी तरह रहने लगते हैँ ।
-यह नाराजगी शरीर को दीमक क़ी तरह चट कर जाती हैँ । इस से शरीर क़ी रोग विरोधी क्षमता खत्म हो जाती है ।
-बचपन में कहीँ कुछ ऐसा घटा होता है जो विश्वास को ठेस पहुंचाता है ।
-ना उमीदी, असहायता तथा खो देने का भाव उनकी विचार प्रक्रिया पर हावी रहता है ।
-अपनी सभी समस्याओ का दोष दूसरों पर मढ़ देते हैँ ।
-इस तरह नाराजगी क़ी इमोशन केंसर बन कर शरीर में कहीं न कहीं प्रकट हो जाती हैं ।
-आध्यात्मिक दृश्टि से इसका इलाज प्यार है !
-दवाई के साथ साथ हमें जीवन में प्यार भी लाना है ।
-परमात्मा आप प्यार के सागर हैँ अगर हम यह शब्द एक करोड़ बार सिमरन कर लें तो केंसर का रोग ठीक होने लगेगा ।
-हर पल किसी ना किसी व्यक्ति को मन में देखतें हुए कहते रहो आप प्रेम स्वरूप हैँ तो इस से आप के संबंध और सभी दुख ठीक होने लगेगे ।
-जिन लोगो से हम बोलते नहीं हैँ उन्हे भी जब आप दूर होते हैँ मन में देखतें हुए बाबा या इष्ट को कहते रहा करो आप प्यार के सागर हैँ । आप क़ी यह तरंगे उन्हे भी बदल देंगी ।
-जिन लोगो के प्रति प्रेम नहीं निकलता उनके लिये मन में कहते रहो आप का कल्याण हो ।
-किसी भी जीव जन्तु को देखो मन में कहो आप का कल्याण हो ।
-प्यार के गीत सुना करो । छोटे बच्चों से घिरे रहा करो । बच्चे आप से भरपूर प्यार करेंगे ।
-जहां खेल चल रहें हो वहां जाया करो । आप को एनेर्जी मिलेगी ।
-जहां शब्द कीर्तन और बड़े बड़े समागम होते हैँ वहां जाने से हमें शक्ति मिलती हैँ ।
-पार्क में और फूलो के बीच बैठा करो ।
-मन पसंद लोगो से बाते किया करो ।
-हर पल किसी ना किसी महान गुरु को मन में याद करते रहो ।
-जितना मन में प्यार हिलोरे लेता रहेगा उतना ही सभी बीमारियो से बचे रहेंगे तथा जीवन में मनचाहे लक्ष्य प्राप्त करेंगे ।
जीवन को नई दिशा देने वाली – आन्तरिक बल ( भाग -1 ) और आंतरिक बल ( भाग -2 )
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Milakh Raj Sandha, Hisar, Haryana, 9896348516
